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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 13, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 13, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

संप्रबुद्धाशया ये तु दुष्कृतानां परिक्षये । तेषां शास्त्रविचारेषु निर्मला धीः प्रवर्तते ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

पापकर्म का क्षय होने पर पुरुष को ज्ञानप्राप्ति होती है, इस अर्थवाले स्मृतिवचन के बल से शास्त्र भी जिनका चित्त शुद्ध हो गया है, ऐसे पुरुषों के प्रति ही फलदायक होते हैं, औरों के लिए नहीं, ऐसा कहते हैं । (४५) यहाँ पर यक्ष आदि तीनों का ग्रहण केवल उदाहरण के लिए हैं परिगणन के लिए नहीं है, क्योंकि मनुष्य आदि में भी जीवनमुक्तों का संभव है । पापों का विनाश होने पर जिनका अन्तःकरण शुद्ध हो गया है, उन्हींकी निर्मल बुद्धि शास्त्रविचार में प्रवृत्त होती है