Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 14, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 14, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 14 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
क्षणादवापतुस्तत्र पुष्पलोलतरङ्गिणीम् ।
समङ्गां सरितं साधु सर्वपुष्पमयीमिव ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
पृथिवी पर क्षणमात्रे फूलों
से चंचल तरंगों से युक्त समंगा नदी पर पहुँचे मालूम होता था कि वह सम्पूर्णतः पुष्पों से ही बनी हुई
हे