Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 14, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 14, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 14 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
उन्मील्य नेत्रे सोऽपश्यदन्ते कालभृगू प्रभू ।
समोदयाविवायातौ देवौ शशिदिवाकरौ ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
उसने आँखें
खोलकर समीप में आये हुए एक साथ उदित हुए सूर्य ओर चन्द्रमा तुल्य काल ओर भृगु को देखा