Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 14, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 14, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 14 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
विबुध्यतामिति गिरा समाधेर्विरराम सः ।
भार्गवोऽम्भोदघोषेण शनैरिव शिखण्डभृत् ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे मेघ के गम्भीर स्वर से मोर जाग
जाता हे वैसे ही "जागो" इस वाणी से वह भृगुपुत्र समाधि से धीरे-धीरे जाग उठा