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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 14, Verse 31

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 14, verse 31 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 14 · श्लोक 31

संस्कृत श्लोक

यो न शास्त्रेण तपसा न ज्ञानेनापि विद्यया । विनष्टो मे मनोमोहः क्षीणोऽसौ दर्शनेन वाम् ॥ ३१ ॥

हिन्दी अर्थ

जो मनोमोह शारत्राभ्यास, तपश्चर्या, उपासना तथा ब्रह्मज्ञान से नष्ट नहीं हुआ था, वह मेरा मनोमोह आप लोगों के दर्शन से दूर हो गया। (उन लोगों की प्रशंसा के लिये यहाँ पर अतिशयोक्ति है )