Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 14, Verse 33
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 14, verse 33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 14 · श्लोक 33
संस्कृत श्लोक
चरणाभ्यामिमं देशं भवन्तौ भूरितेजसौ ।
कौ पवित्रितवन्तौ नः शशाङ्कार्काविवाम्बरम् ॥ ३३ ॥
हिन्दी अर्थ
हे भगवन्, आकाश को चन्द्रमा और सूर्य के तुल्य इस हमारे देश को
अपने चरणों से पवित्र बनानेवाले महातेजस्वी आप लोग कौन हैं ?