Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 14, Verse 41
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 14, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 14 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
भ्रान्तं मन्दरकुञ्जेषु फुल्लहेमलतालिषु ।
मेरोः कल्पतरुच्छायापुष्पसुन्दरसानुषु ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
फूली
हुई सुवर्णलताओं की पंक्तियों से पूर्णं मन्दराचल के निकुजो में मैंने भ्रमण किया