Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 14, Verse 42
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 14, verse 42 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 14 · श्लोक 42
संस्कृत श्लोक
न तदस्ति न यद्भुक्तं न तदस्ति न यत्कृतम् ।
न तदस्ति न यद्दृष्टमिष्टानिष्टासु वृत्तिषु ॥ ४२ ॥
हिन्दी अर्थ
ऐसी कोई
वस्तु नहीं है, जिसका मैंने भोग न किया हो, ऐसी कोई क्रिया नहीं है, जो मैंने नहीं की हो और ऐसी कोई
वस्तु नहीं है, जो मैंने अनुकूल या प्रतिकूल दशा में न देखी हो यानी सब कुछ किया, सबका भोग किया
और सब कुछ देखा