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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 16, Verse 1

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 16, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 16 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । अथाक्षिप्य वचस्तस्य तनयस्य तथा भृगोः । उवाच भगवान्कालो वचो गम्भीरनिःस्वनः ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

वसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामचन्द्रजी, तदनन्तर भृगु तथा भृगुपुत्र शुक्राचार्य के विलापवचन को बीच में ही रोककर गम्भीर ध्वनि से युक्त भगवान काल ने वचन कहा

सर्ग सन्दर्भ

पन्द्रहर्वो सर्ग समाप्त सोलहवाँ सर्ग काल के चले जाने पर काल की आज्ञानुसार शुक्राचार्य का अपने शरीर में प्रवेश करना तथा उनकी दैत्यों की गुरुता ओर जीवन्मुक्ति का वर्णन |