Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 16, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 16, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 16 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
भृगुर्ददर्श सस्नेहं प्राक्तनीं तानवीं तनुम् ।
मत्तो जातेयमित्यास्थां हसन्नपि महामतिः ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
पहले की भोति यौवन, सौन्दर्य आदिसे युक्त वह नूतन पुत्र की देह स्नेह पूर्वक महामति
भृगुजी ने देखी तथा तत्त्वदृष्टि से अनुचित जानकर हँस रहे भी उन्होने यह शरीर मुझसे उत्पन्न है, ऐसी
धारणा की