Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 16, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 16, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 16 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
पिताथ प्राक्तनीं तन्वा आलिलिङ्गाकृतिं ततः ।
स्नेहार्द्रवृत्तिर्जलदश्चिरादद्रितटीमिव ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर स्नेह से आद्र चित्तवाले पिता ने (भृगुजी ने) पुत्र शरीर की यौवन सौन्दर्य आदिसे युक्त
प्राक्तन मूर्ति का बहुत देर तक ऐसे आलिंगन किया जैसे आरद्रवृत्तिवाले मेच पर्वत के प्रान्त का आलिंगन
करता हे