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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 16, Verse 15

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 16, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 16 · श्लोक 15

संस्कृत श्लोक

पुरोऽभिवादयामास पितरं पावनाकृतिम् । प्रथमोल्लासितो मेघः स्तनितेनेव पर्वतम् ॥ १५ ॥

हिन्दी अर्थ

सामने उपस्थित पवित्रमूर्ति पिता का नामगोत्रोच्चारणपूर्वक ऐसे अभिवादन किया जैसे मानों नूतन मेघ अपने गर्जन से पर्वत का अभिवादन कर रहा हो