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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 16, Verse 14

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 16, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 16 · श्लोक 14

संस्कृत श्लोक

अथ शुक्रः समुत्तस्थौ वहत्प्राणसमीरणः । रसमारुतसंयोगादापूर्ण इव वारिदः ॥ १४ ॥

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर शुक्राचार्य जल तथा वायु के संयोग से सर्वतः पूर्ण मेघ के तुल्य प्राणवायु के संचार से युक्त होकर उठ खड़े हुए