Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 16, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 16, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 16 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
नलिनी प्रावृषीवासौ मधाविव नवा लता ।
यदा पूर्णा तदा तस्याः प्रान्ताः पल्लविता बभुः ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
जब वह शरीर वर्षा ऋतु मे कुमुदिनी की भति तथा
वसन्त ऋतु में अभिनव लता की भाँति पूर्ण हो गया, तब उसके अंगुली, नख, केश आदि पल्लव के
तुल्य उदित होकर सुशोभित होने लगे