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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 16, Verse 12

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 16, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 16 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

सर्वा नाड्यस्ततस्तन्वास्तस्याः पूर्णा विरेजिरे । सरितः प्रावृषीवाम्बुपूरपूरितकोटराः ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

अभिषेक के अनन्तर उस शरीर की सम्पूर्ण नाड़ियाँ ऐसे दीप्त हो उठी जैसे वर्षा ऋतु में जल प्रवाह से पूरित कोटरवाली नदियाँ दीप्त हो जाती हैं