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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 16, Verse 23

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 16, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 16 · श्लोक 23

संस्कृत श्लोक

एवं तौ कानने तस्मिन्पावने भृगुभार्गवौ । संस्थितौ तापसौ दीप्तौ दिवीव शशिभास्करौ ॥ २३ ॥

हिन्दी अर्थ

इस तरह उस पवित्र वन में वे दोनों तपस्वी भृगु तथा भृगुपुत्र शुक्राचार्य आकाश में चन्द्रमा और सूर्य की भाँति दीप्त होते हुए स्थित हो गये