Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 16, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 16, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 16 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
चेरतुर्ज्ञातविज्ञेयौ जीवन्मुक्तौ जगद्गुरू ।
देशकालदशौघेषु सुसमौ सुस्थिरौ ततः ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर जगत के गुरु वे दोनों जीवन्मुक्त होकर भ्रमण करने लगे। उन्होने विज्ञेय आत्मतत्त्व
को जान लिया था तथा देश ओर काल की शुभ ओर अशुभ दशाओं मे वे समानभाव से रहते थे, क्योकि
वे अपने स्वरूप में स्थिर हो गये थे