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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 16, Verse 26

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 16, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 16 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

शुक्रोऽसौ प्रथममिति क्रमेण जातस्तस्मात्सत्परमपदादुदारकीर्तिः । स्वेनाशु स्मृतिपदविभ्रमेण पश्चादन्येषु प्रविलुलितो दशान्तरेषु ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

पूर्वोक्त शुक्राचार्य की स्थिति का संक्षेप से उपसंहार करते हैं। यह उदार कीर्तिवाले शुक्राचार्य पहले उस सत्यपरमात्म तत्त्व से पूर्वोक्त आकाशादिक्रम से उत्पन्न हए । तदनन्तर शीघ्र ही स्मरण में आरूढ अप्सरा के निमित्त से उत्पन्न अपने मनोराज्य के विभ्रम से अन्यान्य विविध दिशाओं में इन्होंने भ्रमण किया