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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 16, Verse 3

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 16, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 16 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

काले पूर्वजया तन्वा तपः कृत्वा तया पुनः । गुरुत्वमसुरेन्द्राणां कर्तव्यं भवतानघ ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

हे निष्पाप शुक्राचार्यजी, ग्रहाधिकार को प्राप्त करानेवाले प्रारब्ध के उदयकाल में सर्वप्रथम उत्पन्न हुई उस देह से फिर तप करके आप दैत्यराजो का आचार्यत्वं कीजिये