Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 17, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 17, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 17 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
एवं नगरवृन्दानि नभस्संकल्परूपिणि ।
सन्ति तानि न दृश्यन्ते मिथ्याज्ञानदृशं विना ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
इसी प्रकार
संकल्परूपी आकाश में अनेक जगद्रूपी नगर हैं; पर वे ज्ञानदृष्टि के बिना मिथ्या प्रतीत नहीं होते