Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 17, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 17, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 17 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
पिशाचयक्षरक्षांसि सन्त्येवंरूपकाणि ह ।
संकल्पमात्रदेहानि सुखदुःखमयानि च ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
इसी प्रकार के संकल्पमात्र शरीरवाले सुख-दुःखमय पिशाच, यक्ष, राक्षस भी हैं। भाव यह कि पिशाच
आदि भाव केवलमात्र संकल्प से कल्पित हैं, किन्तु: सुख-दुःख देते हैं