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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 17, Verse 24

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 17, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 17 · श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । यादृग्जगदिदं दृष्टं शुक्रेण पितृशास्त्रतः । तादृक्कस्य स्थितं चित्ते मयूराण्डे मयूरवत् ॥ २४ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीवसिष्ठजी ने कहा : श्रीरामचन्द्रजी, पिता से उत्पन्न चक्षु आदि से या पिता के वचन से और शास्त्र से जैसे उत्पत्ति-विनाश विशिष्ट यह जगत्‌ है, ऐसा शुक्रने जाना था, ऐहिक पारलौकिक सम्पूर्ण वृत्त उनके चित्त में वैसा ही संस्काररूप से स्थित हो गया, जैसेकि मयूर के अण्ड में मयूर रहता है । भाव यह कि पिता के वचन, शास्त्र आदि प्रमाण और प्रमाणाभासों से ही वासना का उदय शुक्र को था । उत्पत्ति-नाश के क्रम का संस्कार साक्षी से ही सिद्ध हो जाता है