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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 17, Verse 25

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 17, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 17 · श्लोक 25

संस्कृत श्लोक

स्वभावकोशस्थमिदं तदेतेन क्रमोदितम् । बीजेनाङ्कुरपत्रादिलतापुष्पफलं यथा ॥ २५ ॥

हिन्दी अर्थ

चैतन्य से अधिष्ठित सजीव अविद्या में स्थित यह सब पिता और शास्त्र के कारण ही क्रम से ऐसे उदित हुआ, जैसे कि बीज से अंकुर, पत्र, लता, पुष्प, फल आदि उदित होते हैं