Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 17, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 17, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 17 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
जीवो यद्बासनाबद्धस्तदेवान्तः प्रपश्यति ।
स्वरूपं चात्र दृष्टान्तो दीर्घस्वप्नस्त्विदं जगत् ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
जीव जिस वासना से बद्ध रहता है,
उसी को अपने अन्दर देखता है, स्वप्न में अपने से कल्पित शरीर इसमें दृष्टान्त है, यह जगत भी तो
दीर्घ स्वप्न ही हे