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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 18, Verse 18

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 18, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 18

संस्कृत श्लोक

कदल्यामन्यता नास्ति यथा पत्रशतेष्वपि । ब्रह्मतत्त्वेऽन्यता नास्ति तथा सर्गशतेष्वपि ॥ १८ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे सैकड़ों पत्तों के होने पर भी केले में भेद नहीं हे, वैसे ही सैकड़ों सृष्टियों के रहते भी ब्रह्मतत्त्व में भेद नहीं हे