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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 18, Verse 19

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 18, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 19

संस्कृत श्लोक

बीजमेव रसात्फुल्लं भूत्वा बीजं पुनर्भवेत् । तथा ब्रह्म मनो भूत्वा बोधाद्ब्रह्म परं भवेत् ॥ १९ ॥

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार जगद्भाव को प्राप्त हुए ब्रह्म की पुनः स्वभाव की प्राप्ति में दृष्टान्त कहते है। जैसे वट आदि का बीज ही जल आदिके सम्पर्क से वृक्ष बनकर वृक्ष के शाखा-प्रशाखाओं के विस्तार, फलआदि द्वारा फिर पूर्वतन बीज होता है, वसे ही ब्रह्म भी काम, कर्म आदि रूप जल के सम्पर्क से मन बनकर जन्म-मरण आदिकल्पना द्वारा अधिकारी देह की प्राप्ति होने पर श्रवण, मनन आदि के क्रम से ज्ञानोत्पत्ति होने के कारण प्राक्तन ब्रह्मभाव से आविर्भूत होता है