Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 18, Verse 2

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 18, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

प्रवृत्तिर्वा निवृत्तिर्वा तन्मात्रावृत्तिपूर्वकम् । सर्वस्य जीवजातस्य सुषुप्तत्वादनन्तरम् ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

यह कैसे जाना जाता है ? ऐसी शंका पर कहते हैं। चूँकि सकल जीव संघात की सुषुप्ति के अनन्तर अव्यवहित उत्तर काल में अनादि द्वैतव्यवहार के लिए जो प्रवृत्ति से जो निवृत्ति हे, वह सभी चिदेकरसकी चारों ओर की व्याप्तिसे ही होती हे, यह सर्वानुभवसिद्ध है । इसलिए पूर्वोक्त प्रपंच की भिन्नता स्वप्रकाश चिदेकरस आत्मा के प्रतिभास से है, यह ज्ञात होता है