Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 18, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 18, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

तन्मात्रैक्यप्रणालेन चित्राः सर्गजलाशयाः । परस्परं संमिलन्ति घनतां यान्ति चाभितः ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

विचित्र सृष्टिरूपी विविध जलाशय पूर्वोक्त चिन्मात्ररूपी एक मार्ग से परस्पर एक दूसरे से मिलते हैं और दूसरे के व्यवहार के संवाद आदि से सत्यत्व भ्रान्ति की दृढ़ता होने के कारण चारों ओर से निविड जडता को प्राप्त होते हैं