Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 18, Verse 66
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 18, verse 66 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 66
संस्कृत श्लोक
यथा देहोपयुक्तं हि करोत्यारोग्यमौषधम् ।
तथेन्द्रियजयेऽभ्यस्ते विवेकः फलितो भवेत् ॥ ६६ ॥
हिन्दी अर्थ
इन्द्रिय विजय में अभ्यास करके यदि वैराग्य हो, तो वही वैराग्य विवेक का कारण होता है, अन्य
नहीं, ऐसा कहते हैं।
जैसे पथ्य भोजन आदि नियमों से सेवित औषधि आरोग्य करती है, वैसे ही इन्द्रियजय का अभ्यास
हो जाने पर विवेक फलीभूत होता है