Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 18, Verse 69
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 18, verse 69 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 69
संस्कृत श्लोक
चित्रामृतं नामृतमेव विद्धि चित्रानलं नानलमेव विद्धि ।
चित्राङ्गना नूनमनङ्गनेति वाचा विवेकस्त्वविवेक एव ॥ ६९ ॥
हिन्दी अर्थ
रागी पुरुष द्वारा वाणीमात्र से प्रदर्शित विवेक अविवेक की शाखा-प्रशाखारूप होने से अविवेक ही
है, ऐसा दथतिहै।
श्रीरामचन्द्रजी, चित्र मे लिखित अमृत या जल को आप अनमृत या अजल ही जानिये, चित्र में
लिखित अग्नि को आप अनग्नि ही जानिये एवं चित्र में लिखित रत्री स्त्री नहीं हे, इसी प्रकार वचन
से प्रदर्शित विवेक भी अविवेक ही हे