Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 18, Verse 70
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 18, verse 70 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 70
संस्कृत श्लोक
पूर्वं विवेकेन तनुत्वमेति रागोऽथ वैरं च समूलमेव ।
पश्चात्परिक्षीयत एव यत्नः स पावनो यत्र विवेकितास्ति ॥ ७० ॥
हिन्दी अर्थ
पहले विवेक से राग (विषयेच्छा) घटता है, इसमें सन्देह
नहीं है, राग के घटने से वैर समूल नष्ट हो जाता, तदनन्तर इष्ट की प्राप्ति ओर अनिष्ट के परिहार
के अनुकूल प्रवृत्ति, ज्ञान का उदय होने से मूलोच्छेद होने के कारण, अवश्य नष्ट हो जाती हे ।
इसलिए जिसमें विवेकिता है, वही पुरुष तत्त्वदर्शनरूप तन्मात्रयुक्ति की स्थिति का योग्य भाजन है
यानी पवित्र हे