Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 18, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 18, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
वर्तमानं मनोराज्यं नैष्फल्यं समुपागता ।
सा कृत्तिर्मनसो ज्ञेया तस्य जीवपरम्परा ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
इसीलिए चित्तों का भेद और चित्तोपाधिक जीवों का भेद सिद्ध होता है, इस आशय से कहते हैं।
एक मन की दूसरे मन में वर्तमान मनोराज्यों के प्रति उसके दर्शन, उपभोग आदि की असमर्थतारूप
निष्फलता को प्राप्त हुई जो स्थिति है, उसी को आप मन के भेदमें हेतु जानिये उसी से जीव भेद भी
जानिये