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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 19, Verse 10

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 19, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 19 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

जाग्रत्त्वे क्षणदृष्टः स्यात्स्वप्नः कालान्तरे स्थितः । तज्जाग्रत्स्वप्नतामेति स्वप्नो जाग्रत्त्वमृच्छति ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

यदि स्वप्न भी कालान्तर में स्थित है, तब तो जाग्रतरूप होने से क्षणमात्र में यह जाग्रत ही है, यह प्रत्यक्ष अनुभव से ही दृष्ट हो जायेगा। यदि जाग्रत भी कालान्तर में स्थित नहीं है, तो वह स्वप्न ही है। इस तरह जाग्रत स्वप्नता को और स्वप्न जाग्रद्भाव को प्राप्त होता हे