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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 19, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 19, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 19 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । स्थिरप्रत्यययुक्तं यत्तज्जाग्रदिति कथ्यते । अस्थिरप्रत्ययं यत्स्यात्तत्स्वप्नः समुदाहृतः ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

बार-बार संवादयुक्त प्रतीति से प्राप्त स्थिर प्रतीति की योग्यता ही जाग्रत के पदार्थों में सत्यत्वव्यवहार की हेतु है, इस तरह श्रीवसिष्ठजी समाधान करते हैं। श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे वत्स श्रीरामचन्द्रजी, जो स्थिर प्रतीति से युक्त होता है, उसे जाग्रत कहते हैं और जो अस्थिर प्रतीति से युक्त होता है, वह स्वप्न कहा गया है