Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 19, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 19, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 19 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
समतामागतैर्वातैः क्षोभ्यते न हृदम्बरे ।
निर्वातसदने दीपो यथाऽऽलोकैककारकः ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे कि विक्षेपशून्य प्रकाश का एकमात्र निमित्त दीपक
निर्वाति (वायुरहित) घर में क्षोभ को प्राप्त नहीं होता है वैसे ही सुषुप्ति को प्राप्त हुआ पुरुष समता को
प्राप्त वायुओं से हृदयाकाशमें तनिक भी क्षोभ को प्राप्त नहीं होता