Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 19, Verse 31
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 19, verse 31 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 19 · श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
रक्तापूर्णो रक्तवर्णान्देशान्कालान्बहिर्यथा ।
पश्यत्यनुभवात्मत्वात्तत्रैव च निमज्जति ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
नाड़ी के अन्दर स्थित
रुधिर से आप्लावित होकर गेरु आदि धातुओं से व्याप्त प्रदेशों को और लाल बादलों से भरे हुए सन्ध्या
आदि कालों को बाहर के सदुश अपने अन्दर ही देखता है, अनुभवरूप होने से उन्हीं मे निमग्न हो जाता
है