Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 19, Verse 34
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 19, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 19 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
समाक्रान्तेन्द्रियच्छिद्रो यः क्षुब्धो वायुना यदा ।
परिपश्यति तज्जाग्रदित्याहुर्मुनिसत्तमाः ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
जब वायु से क्षुब्ध हुआ जीव इन्द्रिय छिद्रों का आक्रमण
करनेवाला होकर बाहर शब्द आदि को देखता हे, तब वह दर्शन जाग्रत कहलाता हे