Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 20, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 20, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 20 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
यदतुच्छमनायासमनुपाधि गतभ्रमम् ।
यत्नात्तदनुसंधानं कुरु तत्तामवाप्स्यसि ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
मन सब पदार्थो की प्राप्ति में समर्थ हो, उससे मेरा क्या काम ? ऐसी यदि शंका हो, तो उस पर
कहते हैं ।
जो वस्तु अतुच्छ है, आयास रहित है, उपाधिशून्य है और भ्रमहीन है, प्रयत्न के साथ आप उसका
अनुसन्धान कीजिये। उससे आप तत्स्वरूपता को प्राप्त होंगे। भाव यह है कि मोक्ष के लिए प्रयत्न करने
पर आपको मोक्ष की प्राप्ति होगी