Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 20, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 20, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 20 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
अभिपतति मनःस्थितं शरीरं नतु वपुराचरितं मनः प्रयाति ।
अभिपततु तवात्र तेन सत्यं सुभग मनः प्रजहात्वसत्यमन्यत् ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
पहले कहे गये अर्थ का ही संक्षेप कर उपसंहार करते हैं।
मन के इच्छित स्थान या विषय को शरीर प्राप्त होता है। शरीर से किये गये स्थान या विषय को मन
नियमतः प्राप्त नहीं होता, इसलिए हे सुभग, मन की इच्छित सिद्धि होने पर देह, इन्द्रिय आदि के
नियमन में समर्थ होने के कारण आपका भी मन परमार्थभूत आत्मतत्त्व को प्राप्त हो, अन्य असत्य द्वैत
भ्रमों का त्याग करे