Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 21, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 21, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
यन्मयं हि मनो राम देहस्तदनु तद्वशः ।
तत्तामायाति गन्धान्तः पवनो गन्धतामिव ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे सुगन्धित पदार्थ के
भीतर स्थित वायु सुगन्धिता को प्राप्त होता है, वैसे ही मन जिस प्रकार के भाव से युक्त होता है, उसके
बाद उसका वशवर्ती शरीर भी तन्मय हो जाता है