Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 21, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 21, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
यं यं भावमुपादत्ते तं तं वस्त्विति विन्दति ।
तत्तच्छ्रेयोऽन्यन्नास्तीति निश्चयोऽस्य च जायते ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
मन जिस जिस भाव को प्राप्त होता
है, उसी उसी को वस्तुरूप से प्राप्त होता है, वही श्रेय है, उससे अतिरिक्त श्रेय नहीं है, ऐसे निश्चय को
प्राप्त हो जाता है। भाव यह कि इसीलिए निःसार अपने-अपने अभिमत वस्तु में प्राणियों और वादियों
का पक्षपात देखा जाता है