Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 21, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 21, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
धर्मार्थकाममोक्षार्थं प्रयतन्ते सदैव हि ।
मनांसि दृढभिन्नानि प्रतिपत्त्या स्वयैव च ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
अपनी ही प्रतीति से अत्यन्त अनुविद्ध हुए मन धर्म, अर्थ, काम और
मोक्ष के लिऐ सदा ही प्रयत्न करते हैं। भाव यह कि अपने निश्चयानुसार जिसका मन जिस प्रकार के
निर्णय से युक्त होता है, वह उसी के अनुसार धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के लिए प्रयत्न करता है