Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 21, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 21, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
मनो वै कापिलानां तु प्रतिपत्तिनिजामलम् ।
उररीकृत्य निर्णीय कल्पिताः शास्त्रदृष्टयः ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
उन वादियों में कपिलजी के अनुयायियों का मन विवेकी होने से असंग, चिन्मात्र त्वंपदार्थविषयक
अपनी प्रतिपत्ति से निर्मल ही है । ततपदार्थ के विषय में वे श्रुति का अवलम्बन नहीं करते, इसलिए मोह
वश अपनी बुद्धि से ही सुखदुःख मोहरूप जड़ जगत का सुखदुःख मोहरूप जड त्रिगुणात्मक प्रधान ही
उपादान हो सकता है, ऐसा स्वीकार कर पुनः पुनः उसी के आस्वादन से वही एकमात्र तत्त्व है, ऐसा
निर्णय कर उन्होने ऐसी ही शास्त्रदृष्टियों की कल्पना की हे