Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 21, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 21, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
मोक्षे तु नान्यथा प्राप्तिरिति भावितचेतसः ।
स्वां दृष्टिं प्रतिबिम्बन्ति स्थिताः स्वनियमभ्रमैः ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
हमने जो उपाय कहा है, उसके बिना
किसी को भी मोक्ष की प्राप्ति नहीं हो सकती है, इस प्रकार के निश्चय से युक्त चित्तवाले लोग अपने
कल्पित नियम रूपी भ्रमों से भ्रम में स्थित और अन्य उपायरूपी मतों से विमुख होकर ग्रन्थ रचना आदि
द्वारा अपनी दृष्टि को औरों की बुद्धियों में संक्रान्त करते हैं