Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 21, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 21, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
वेदान्तवादिनो बुद्ध्या ब्रह्मेदमिति रूढया ।
मुक्तिः शमदमोपेता निर्णीय परिकल्पिता ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
ऐसे ही वेदान्तवादी भी हैं, ऐसा कहते हैं।
श्रुतिरूप प्रमाण से अध्यारोप ओर अपवाद द्वारा यह जगत ब्रह्म ही है, ब्रह्म से अतिरिक्त अणुमात्र
भी कुछ नहीं है, यों बद्धमूल हुई बुद्धि से निर्णय करके सर्वानिर्थनिवृत्ति ओर वास्तविक निरतिशयानन्द
अपरिच्छिन्न ब्रह्मात्मभाव के आविर्भाव रूप से अपने स्थान में ही प्राप्त हुई, न कि अर्चिरादि मार्ग से
दूरगमन द्वारा प्राप्त हुई मुक्ति है, यों वेदान्तियों ने मुक्ति का सर्वोत्कृष्टता से समर्थन किया है