Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 21, Verse 30
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 21, verse 30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
आर्हतादिभिरन्यैश्च स्वयाभिमतयेच्छया ।
चित्राश्चित्रसमाचारैः कल्पिताः शास्त्रदृष्टयः ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
आर्हत
(अरिहंत) आदि अन्यान्य लोगों ने भी अपनी अभिमत इच्छा से (५) जीव, अजीव, आस्रव, संवर,
निर्जर, बन्ध, मोक्षआदि पदार्थो की कल्पना द्वारा स्यादस्ति, स्यान्नास्ति, स्यादस्ति च नास्ति च,
स्यादवक्तव्यः, स्यादस्ति चावक्तव्यश्च, स्यान्नास्ति चावक्तव्यश्च, स्यादसरित नास्ति चावक्तव्यश्च
इत्यादि सप्तभंगी न्याय की कल्पनाओं से ओर नंगे रहना, भिक्षा करना आदि विचित्र आचारो से विचित्र
शास्त्र दृष्टयो की कल्पना कर रक्खी है