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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 21, Verse 32

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 21, verse 32 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 32

संस्कृत श्लोक

सर्वासामेव चैतासां रीतीनामेवमाकरः । मनो नाम महाबाहो मणीनामिव सागरः ॥ ३२ ॥

हिन्दी अर्थ

हे महाबाहो, इन सभी रीतियों का एक मात्र मन ही आगार है, जैसे कि मणियों का सागर आगार है