Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 21, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 21, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
पूर्वापरविचारार्थतत्परेयं मतिस्तव ।
संप्राप्स्यसि पदं प्रोच्चैर्यत्प्राप्तं शंकरादिभिः ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
आपकी बुद्धि पूर्वापर विचार में तत्पर है, इसलिए शंकर आदि देवताओं ने जो पद प्राप्त किया है, उस
ऊँचे पद को आप प्राप्त होंगे