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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 21, Verse 55

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 21, verse 55 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 55

संस्कृत श्लोक

नूनं विस्मारयत्येव मन्मथं मातृभावनात् । भावानुसारिफलदं पदार्थौघमवेक्ष्य च ॥ ५५ ॥

हिन्दी अर्थ

समस्त पदार्थ जातों को भावानुरूपी फल देनेवाले जानकर इस संसार में ज्ञानी पुरुष पदार्थों में एक रूप कभी नहीं कहता