Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 21, Verse 56
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 21, verse 56 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 56
संस्कृत श्लोक
न ज्ञेनेह पदार्थेषु रूपमेकमुदीर्यते ।
दृढभावनया चेतो यद्यथा भावयत्यलम् ॥ ५६ ॥
हिन्दी अर्थ
दृढभावना से चित्त जिस पदार्थ की जैसी खूब भावना
करता है, उस समय तदाकार तत्-तत् फल को देखता है